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वाल्मीकि रामायण 36.59

अहं युष्मान्समाश्रित्य तपोनिर्धूतकल्मषान् ।
अनुग्रहीतः पितृभिर्भविष्यामि सुनिर्वृतः ।। ७.३६.५९ ॥

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