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वाल्मीकि रामायण 36.45

पराक्रमोत्साहमतिप्रतापसौशील्यमाधुर्यनयानयैश्च ।
गाम्भीर्यचातुर्यसुवीर्यधैर्यैर्हनूमतः को ऽभ्यधिको ऽस्ति लोके ।। ७.३६.४५ ॥

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