ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 3434.30वाल्मीकि रामायण 34.30बहुयोजनसाहस्रं वहमानो महाहरिः । वायुवच्च मनोवच्च जगाम सह शत्रुणा ।। ७.३४.३० ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय