ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 3434.28वाल्मीकि रामायण 34.28सभाज्यमानो भूतैस्तु खैचरैः खैचरोत्तमः । पश्चिमं सागरं वाली ह्याजगाम सरावणः ।। ७.३४.२८ ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय