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वाल्मीकि रामायण 34.24

अन्वीयमानस्तैर्वाली भ्राजते ऽम्बरमध्यगः ।
अन्वीयमानो मेघौघैरम्बरस्थ इवांशुमान् ।। ७.३४.२४ ॥

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