ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 3333.8वाल्मीकि रामायण 33.8ततस्तमृषिमायान्तमुद्यन्तमिव भास्करम् । अर्जुनो दृश्य सम्भ्रान्तो ववन्देन्द्र इवेश्वरम् ।। ७.३३.८ ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय