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वाल्मीकि रामायण 33.20

पितामहसुतश्चापि पुलस्त्यो मुनिपुङ्गवः ।
मोचयित्वा दशग्रीवं ब्रह्मलोकं जगाम ह ।। ७.३३.२० ॥

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