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वाल्मीकि रामायण 32.9

पश्चिमेन तु तं दृष्ट्वा सागरोद्गारसन्निभम् ।
वर्धन्तमम्भसो वेगं पूर्वामाशां प्रविश्य तु ।। ७.३२.९ ॥

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