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वाल्मीकि रामायण 32.63

स विह्वलं तदालक्ष्य दशग्रीवं ततो ऽर्जुनः ।
सहसोत्पत्य जग्राह गरुत्मानिव पन्नगम् ।। ७.३२.६३ ॥

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