ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 3232.57वाल्मीकि रामायण 32.57तथैव रावणेनापि पात्यमाना मुहुर्मुहुः । अर्जुनोरसि निर्भाति गदोल्केव महागिरौ ।। ७.३२.५७ ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय