ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 3232.51वाल्मीकि रामायण 32.51सागराविव संरब्धौ चलन्मूलाविवाचलौ । तेजोयुक्ताविवादित्यौ प्रदहन्ताविवानलौ ।। ७.३२.५१ ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय