ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 3131.6वाल्मीकि रामायण 31.6इत्येवं बाधमानस्तु पार्थिवान्पार्थिवर्षभ । चचार रावणो राम पृथिवीं पृथिवीपते ।। ७.३१.६ ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय