ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 3131.1वाल्मीकि रामायण 31.1ततो रामो महातेजा विस्मयात्पुनरेव हि । उवाच प्रणतो वाक्यमगस्त्यमृषिसत्तमम् ।। ७.३१.१ ॥अगलापूरा अध्याय