ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 2828.47वाल्मीकि रामायण 28.47तद्विकृष्य महच्चापमिन्द्रो रावणमूर्धनि । निपातयामास शरान्पावकादित्यवर्चसः ।। ७.२८.४७ ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय