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वाल्मीकि रामायण 28.31

दैत्यैर्निशाचरैश्चैव स रथः परिवारितः ।
समराभिमुखो दैत्यो महेन्द्रं सो ऽभ्यवर्तत ।। ७.२८.३१ ॥

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