ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 2727.6वाल्मीकि रामायण 27.6स तु दीनः परित्रस्तो महेन्द्रो रावणं प्रति । विष्णोः समीपमागत्य वाक्यमेतदुवाच ह ।। ७.२७.६ ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय