ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 2626.15वाल्मीकि रामायण 26.15दिव्यचन्दनलिप्ताङ्गी मन्दारकृतमूर्धजा । दिव्योत्सवकृतारम्भा पूर्णचन्द्रनिभानना ।। ७.२६.१५ ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय