Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 25.6

उशना त्वब्रवीत्तत्र यज्ञसम्पत्समृद्धये ।
रावणं राक्षसश्रेष्ठं द्विजश्रेष्ठो महातपाः ।। ७.२५.६ ॥

पूरा अध्याय