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वाल्मीकि रामायण 25.26

कुम्भकर्णे महाराज निद्रामनुभवत्यथ ।
निहत्य राक्षसश्रेष्ठानमात्यानिह सम्मतान् ।। ७.२५.२६ ॥

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