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वाल्मीकि रामायण 24.29

सो ऽपि त्वया हतस्तात रिपुणा भ्रातृगृध्नुना ।
त्वया ऽस्मि निहता राजन्स्वयमेव हि बन्धुना ।। ७.२४.२९ ॥

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