ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 1717.5वाल्मीकि रामायण 17.5कस्यासि किमिदं भद्रे कश्च भर्ता वरानने । येन सम्भुज्यसे भीरु स नरः पुण्यभाग्भुवि ।। ७.१७.६ ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय