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वाल्मीकि रामायण 17.41

एवमेषा महाभागा मर्त्येषूत्पत्स्यते पुनः ।
क्षेत्रे हलमुखोत्कृष्टे वेद्यामग्निशिखोपमा ।। ७.१७.४१ ॥

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