ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 1717.14वाल्मीकि रामायण 17.14ततो मे जननी दीना तच्छरीरं पितुर्मम । परिष्वज्य महाभागा प्रविष्टा हव्यवाहनम् ।। ७.१७.१५ ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय