ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 1414.28वाल्मीकि रामायण 14.28स शैलशिखराभेण तोरणेन समाहतः । जगाम न क्षतिं वीरो वरदानात्स्वयम्भुवः ।। ७.१४.२८ ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय