ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 1414.15वाल्मीकि रामायण 14.15स कक्षमिव विस्तीर्णं शुष्केन्धनमिवाकुलम् । वातेनाग्निरिवायत्तो यक्षसैन्यं ददाह तत् ।। ७.१४.१५ ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय