ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 1313.36वाल्मीकि रामायण 13.36हितं नैष ममैतद्धि ब्रवीति धनरक्षकः । महेश्वरसखित्वं तु मूढ श्रावयते किल ।। ७.१३.३६ ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय