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वाल्मीकि रामायण 111.15

आदिकाव्यमिदं त्वार्षं पुरा वाल्मीकिना कृतम् ।
यः शृणोति सदा भक्त्या स गच्छेद्वैष्णवीं तनुम् ।। ७.१११.१५ ॥

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