ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 1111.25वाल्मीकि रामायण 11.25तद्भवान्यदि नो ह्यद्य दद्यादतुलविक्रम । कृता भवेन्मम प्रीतिर्धुर्मश्चैवानुपालितः ।। ७.११.२५ ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय