ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 108108.28वाल्मीकि रामायण 108.28यावच्चन्द्रश्च सूर्यश्च यावत्तिष्ठति मेदिनी । यावच्च मत्कथा लोके तावद्राज्यं तवास्त्विह ।। ७.१०८.२८ ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय