ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 108108.21वाल्मीकि रामायण 108.21यदि राम विनास्माभिर्गच्छेस्त्वं पुरुषोत्तम । यमदण्डमिवोद्यम्य त्वया स्म विनिपातिताः ।। ७.१०८.२१ ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय