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वाल्मीकि रामायण 107.21

अभिषिच्य सुतौ वीरौ प्रतिष्ठाप्य पुरे तदा ।
दूतान्सम्प्रेषयामास शत्रुघ्नाय महात्मने ।। ७.१०७.२१ ।।

पूरा अध्याय