ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 106106.11वाल्मीकि रामायण 106.11स त्वं पुरुषशार्दूल त्रैलोक्यस्याभिपालनात् । लक्ष्मणेन विना चाद्य जगत्स्वस्थं कुरुष्व ह ।। ७.१०६.११ ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय