ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 105105.3वाल्मीकि रामायण 105.3मुनेस्तु भाषितं श्रुत्वा लक्ष्मणः परवीरहा । अभिवाद्य महात्मानं वाक्यमेतदुवाच ह ।। ७.१०५.३ ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय