ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 105105.15वाल्मीकि रामायण 105.15स तु भुक्त्वा मुनिश्रेष्ठस्तदन्नममृतोपमम् । साधु रामेति सम्भाष्य स्वमाश्रममुपागमत् ।। ७.१०५.१५ ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय