ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 104104.1वाल्मीकि रामायण 104.1शृणु राजन्महासत्व यदर्थमहमागतः । पितामहेन देवेन प्रेषितो ऽस्मि महाबल ।। ७.१०४.१ ॥अगलापूरा अध्याय