ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 103103.5वाल्मीकि रामायण 103.5जयस्व राम धर्मेण उभौ लोकौ महाद्युते । दूतस्त्वां द्रष्टुमायातस्तपसा भास्करप्रभः ।। ७.१०३.५ ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय