ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 103103.14वाल्मीकि रामायण 103.14स तथेति प्रतिज्ञाय रामो लक्ष्मणमब्रवीत् । द्वारि तिष्ठ महाबाहो प्रतिहारं विसर्जय ।। ७.१०३.१४ ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय