Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 102.14

भरतो ऽपि तथैवोष्य संवत्सरमतो ऽधिकम् ।
अयोध्यां पुनरागम्य रामपादावुपास्त सः ।। ७.१०२.१४ ॥

पूरा अध्याय