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वाल्मीकि रामायण 101.16

निवेश्य पञ्चभिर्वर्षैर्भरतो राघवानुजः ।
पुनरायान्महाबाहुरयोध्यां केकयीसुतः ।। ७.१०१.१६ ॥

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