ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 1010.28वाल्मीकि रामायण 10.28विभीषण त्वया वत्स धर्मसंहितबुद्धिना । परितुष्टो ऽस्मि धर्मात्मन्वरं वरय सुव्रत ।। ७.१०.२८ ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय