ग्रंथवाल्मीकि रामायणउत्तरकाण्डसर्ग 11.34वाल्मीकि रामायण 1.34दिष्ट्या वर्धसि काकुत्स्थ जयेनामित्रकर्शन । । ७.१.३३ ॥पिछलाअगलापूरा अध्याय