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वाल्मीकि रामायण 99.11

जाम्बवन्तं त्रिभिर्बाणैराजघान स्तनान्तरे।
ऋक्षराजं गवाक्षं च जघान बहुभिः शरैः ।। ६.९९.११ ।।

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