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वाल्मीकि रामायण 98.24

जघ्नतुस्तौ तदा ऽन्योन्यं नेदतुश्च पुनःपुनः।
तलैश्चान्योन्यमाहत्य पेततुर्धरणीतले ।। ६.९८.२७ ।।

पूरा अध्याय