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वाल्मीकि रामायण 97.22

स हि तस्याभिसङ्क्रुद्धः प्रगृह्य विपुलां शिलाम्।
विरूपाक्षाय चिक्षेप सुग्रीवो जलदोपमाम् ।। ६.९७.२२ ।।

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