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वाल्मीकि रामायण 97.17

स तु विद्धः शितैर्बाणैः कपीन्द्रस्तेन रक्षसा।
चक्रोध स महाक्रोधो वधे चास्य मनो दधे ।। ६.९७.१७ ।।

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