ग्रंथवाल्मीकि रामायणयुद्धकाण्डसर्ग 9797.15वाल्मीकि रामायण 97.15स तं द्विरदमारुह्य विरूपाक्षो महारथः। विनदन् भीमनिर्ह्रादं वानरानभ्यधावत ।। ६.९७.१५ ।।पिछलाअगलापूरा अध्याय