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वाल्मीकि रामायण 96.3

सन्दश्य दशनैरोष्ठं क्रोधसंरक्तलोचनः।
राक्षसैरपि दुर्दर्शः कालाग्निरिव मूर्च्छितः ।। ६.९६.३ ।।

पूरा अध्याय