Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 93.47

मैथिली रक्ष्यमाणा तु राक्षसीभिरनिन्दिता।
ददर्श राक्षसं क्रुद्धं निस्त्रिंशवरधारिणम् ।। ६.९३.४७ ।।

पूरा अध्याय