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वाल्मीकि रामायण 93.40

रावणः पुत्रशोकेन भृशमाकुलचेतनः।
सङ्क्रुद्धः खड्गमादाय सहसा यत्र मैथिली ।। ६.९३.४० ।।

पूरा अध्याय