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वाल्मीकि रामायण 93.31

तेन मामद्य संयुक्तं रथस्थमिह संयुगे।
प्रतीयात् को ऽद्य मामाजौ साक्षादपि पुरन्दरः ।। ६.९३.३१ ।।

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